Best 10 Lines Short Stories with Moral in Hindi | हिंदी कहानियां

आज इस पोस्ट में हम 10 Lines Short Stories with Moral in Hindi बेस्ट मोरल स्टोरी के बारे में पढ़ेंगे। इन छोटी-छोटी कहानियाँ को पढ़कर आपको बहुत अच्छी सीख मिलेगी। अगर आपको यह शार्ट मोरल स्टोरी पसंद आए तो इस पोस्ट को शेयर जरूर कीजियेगा। तो आए जानते है Moral Short Story in Hindi के बारे में।

1. शहर में कितने कौए (Short Story in Hindi with Moral)

Short story in hindi with moral

बादशाह अकबर आक्सर अपने दरबारियों से अनोखे प्रश्न और तरह-तरह की पहेलियाँ पूछते रहते थे। इस तरह वे अपने दरबारियों की बुद्धि एंव हाजिरजवाबी की परीक्षा लेते रहते थे। एक बार उन्होंने अपने दरबारियों से एक विचित्र प्रश्न पूछा। प्रश्न था, इस शहर में कितने कौए हैं? उन्होंने एक-एक कर सभी दरबारियों पर नजर डाली। 

हर दरबारी खड़ा होता और जवाब न सूझने पर अपना सर इका लेता। कोई भी दरबारी बादशाह के सवाल का जवाब न दे सका। इतने में बीरबल ने दरबार में प्रवेश किया। वे सभी दरबारियों से ज्यादा ज्ञानी थे। उन्होंने देखा कि सभी दरबारी सिर झुकाए खड़े हैं। वे फौरन समझ गए कि बादशाह ने जरूर कोई जटिल समस्या रखी है। 

जिसे कोई दरबारी हल नही कर सका है। बीरबल ने बादशाह का शिष्टतापूर्वक बादशाह का अभिवादन किया और अपने आसन पर बैठ गए। बादशाह ने उनसे पूछा, “बीरबल, तुम बताओ इस शहर में कितने कौए हैं?” हाजिर जवाब बीरबल फौरन खड़े हो गए। उन्होंने जवाब दिया, “हुजूर इस शहर में कुल पचास हजार तीन सौ अठहत्तर कौए हैं।”

“मगर, यह बात तुम इतने विश्वास के साथ कैसे कह सकते हो बीरबल?” बादशाह ने आश्वर्य व्यक्त करते हुए कहा। बीरबल ने जवाब दिया, “हुजूर यदि आपको इसमें संदेह हो तो गिनवा कर देख लीजिए। अगर वे पचास हजार तीन सौ अठहत्तर से ज्यादा है तो इसका मतलब बाहर से कौए अपने मित्रों, रिश्तेदारों से मिलने आए हैं। 

अगर कम हैं, तो वे अपने रिश्तेदारों से मिलने बाहर गए हैं।” बदशाह, बीरबल की हाजिरजबाबी से बहुत खुश हुए उन्होंने कहा, शाबाश बीरबल, तुम सचमुच लाजवाब हो।

Moral – जैसा सवाल वैसा जवाब। 

2. चालाक गधा (10 Lines Short Stories with Moral in Hindi)

Very short story in hindi

एक दिन एक किसान का गधा कुएँ में गिर गया। वह गधा घंटों जोर-जोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं । अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि गधा काफी बूढ़ा हो चूका था, अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिए। 

किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया। सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। जैसे ही गधे कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है, वह और जोर-जोर से चीख-चीख कर रोने लगा और फिर अचानक वह आश्वर्यजनक रुप से शांत हो गया। सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे। 

तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्र्य से सन्न रह गया। अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह गधा एक आश्वर्यजनक हरकत कर रहा था। वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था।

जैसे-जैसे किसान तथा उसके पडोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते। वैसे-वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और ऊपर चढ़ आता। जल्दी ही सबको आश्वर्यचकित करते हुए वह गधा कुएँ के किनारे पर पहुँच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया।

Moral – साहस के साथ हिल-हिल कर हर तरह कि गंदगी को गिरा देना है और उससे सीख लेकर, उसे सीढ़ी बनाकर अपने कदमों को आगे बढ़ते रहना चाहिए।

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3. दो मेढक (Very Short Story in Hindi)

एक बार दो मेढ़क दूध से भरे एक मटके में गिर गए। मटके से बाहर आने के लिए वे दूध में गोल गोल तैरने लगे। मगर उनके पैरो को कोई ठोस आधार नही मिल रहा था। इसलिए छलांग लगाकर बाहर आना उनके लिए मुश्किल हो गया। कुछ देर बाद एक मेढ़क ने दूसरे से कहा, “मै बहुत थक गया हूँ। अब मै ज्यादा तैर नही सकता!” वह हिम्मत हार गया। उसने मटके से बाहर निकलने की कोशिश छोड़ दी। 

इसलिए वह मटके के दूध में डुब कर मर गया। दूसरे मेढ़क ने सोचा, “मै अपनी कोशिश नही छोडूगा। मैं तब तक तैरता रहूँगा जब तक कोई रास्ता नही निकल आता।” वह तैरता ही रहा इस प्रकार उसके लगातार तैरने से दूध मठ उठा और उसके ऊपर माखन जमा हो गया। कुछ देर बाद मेढ़क ने माखन के गोल पर चढ़कर जोर की छलांग लगाई वह मटके के बाहर आ गिरा।

Moral – ईश्वर उसी की मदद करता है, जो स्वयं अपनी मदद करता है।

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4. हँसमुख सरदार (Kids Short Story in Hindi)

एक बहादुर सरदार था। उसने अनेक लड़ाइयाँ लड़ी थीं और उनमें अपनी असाधारण वीरता का परिचय दिया था। वह एक मँजा हुआ तलवारबाज और कलाबाज घुड़सवार था। इतना ही नहीं, वह दिल का भी बहुत उदार था। वह सदा गरीबों और जरूरतमंद लोगों की सहायता किया करता था। असहाय लोग की रक्षा करना वह अपना कर्तव्य समझता था। लोग उसे सच्चे दिल से प्यार करते थे। वे उसकी अच्छाइयों का गुणगान करते और उसका बहुत सम्मान करते थे।

पर इस सरदार के बारे में एक रहस्य की बात थी, जो किसी को मालूम नहीं थी। यहाँ तक की उसके घनिष्ठ मित्रों तक को भी इसका पता नहीं था। सरदार बिल्कुल गंजा था। अपने गंजेपन को छिपाने के लिए वह बालों की टोपी पहना करता था। यह टोपी उसके सिर पर इस प्रकार बैठ जाती थी कि उसके गंजेपन के बारे में किसी को भी शंका नहीं होती थी। एक बार सरदार अपने कुछ मित्रों के साथ जंगल में शिकार खेलने गया। 

वे अपने घोड़ों को सरपट दौड़ाते जा रहे थे कि तभी अकस्मात बड़े जोरो की आँधी आई और सरदार की बालों की टोपी उड़कर दूर जा गिरी। सरदार के गंजेपन का रहस्य खुल गया। सरदार के मित्र उसकी गंजी खोपड़ी देखकर दंग रह गए। उन्हें सपने में भी यह ख्याल नहीं था कि उनका हँसमुख सरदार गंजा है। वे ठठाकर हँस पड़े। 

उन्होंने कहा, “वाह, आपका सिर तो अंडे की तरह सफाचट है। आप हमेशा अपने आप को जवान साबित करते रहे और हमें बेवकूफ बनाते रहे!” “हाँ, मैं हमेशा अपना गंजापन छिपाने का प्रयास करता रहा। पर मुझे मालूमें था कि एक दिन मेरा यह राज खुलकर रहेगा। जब मेरे अपने बालों ने मेरा साथ नहीं दिया। तो दूसरों के बाल मेरे सिरपर सदा के लिए कैसे रह सकते है?” 

यह कहकर सरदार हो, हो करता हुआ खिलखिलाकर हॅँस पड़ा। जब सरदार के मित्रों ने देखा कि वह स्वयं आपने आप पर हँस रहा है। तो वे उस पर हँसने के कारण बहुत शर्मंदा हुए। उन्होंने सरदार से कहा, “सरदार, आप वाकई बहुत दिलदार हैं।” 

Moral – जो अपने पर हँस सकता है, वह कभी हँसी का पात्र नहीं बन सकता।

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5. चतुर चित्रकार (10 Lines Short Stories with Moral in Hindi)

एक धनवान बुढ़िया थी। एक बार उसने एक नामी चित्रकार से अपना चित्र बनाने के लिए कहा। चित्रकार ने उसका चित्र बनाने के लिए कई दिनों तक मेहनत की। जब चित्र बनकर तैयार हो गया, तो चित्रकार ने उस महिला को अपने स्टुडियो में चित्र देखने के लिए बुलवाया। इससे बुढिया बहुत खुश हुई। 

वह चित्र देखने के लिए चित्रकार के स्टुडियो पहुँची। वह अपने साथ अपने कुत्ते को भी ले आई थी। बुढ़िया ने वह चित्र अपने कुत्ते को दिखाते हुए कहा, टामी डारलिंग, देख तो, ये तेरी मालकिन हैं। पर कुत्ते ने उसमें कोई रूचि नहीं दिखाई। धनवान बुढ़िया ने चित्रकार की ओर मुड़ते हुए कहा, ” मुझे नही चाहिए यह चित्र! मेरा चतुर कुत्ता तक चित्र में मुझे पहचान नहीं सका।” 

चित्रकार बहुत व्यवहारकुशल और बुद्धिमान था। वह अमीरों की इस तरह की सनक से भलीभाँति परिचित था। उसने नम्रतापूर्वक कहा, “मैडम आप कल फिर आइए! कल मैं इसे इतना स्वाभाविक रूप दे दूँगा कि यह चित्र आपकी शक्ल-सूरत से हूबहू मिलता-जुलता बन जाएगा। फिर आपका टामी इसे देखकर दुम हिलाता हुआ इसे चाटने लगेगा।” 

दूसरे दिन बुढ़िया फिर अपने कुत्ते को लेकर चित्रकार के स्टुडियो पहुँची। कुत्ता चित्र को देखते ही अपनी दुम हिलाता हुआ दौड़कर उसके पास पहुँचा और उसे चाटने लगा। बुढ़िया यह देखकर पुलिकित हो उठी। उसने कहा, “वाह! कितना खूबसूरत चित्र बनाया है, आपने! मेरे टामी को यह पसंद आ गया है, इसलिए मुझे भी यह पसंद है। लाइए, इसे बाँधकर मुझे दे दीजिए। 

चित्रकार ने चित्र के लिए एक मोटी रकम की माँग की और महिला ने खुशी-खुशी पैसे अदा कर दिए।” जब बुढ़िया चित्र लेकर चली गई, तो चित्रकार को बहुत हँसी आई। उसने पहले वाले चित्र में कुछ भी नहीं बदला था। उसने उस चित्र पर केवल मसाले दार गोश्त का टुकड़ा लेकर रगड दिया था। बस, गोश्त की महक नाक में जाते ही कुत्ता चित्र को चाटने लगा था।

Moral – सूझबूझ से काम लेने पर बिगड़ी बात भी सुधर जाती है।

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6. ग्वालिन और उसका सपना (Hindi Short Moral Stories)

एक ग्वालिन थी। वह दूध बेचने जा रही थी। उसके सर पर दूध से भरा घड़ा था। चलते-चलते मन ही मन विचार कर रही थी। इस दूथ को बेचने से जो पैसा मिलेगा। उन पैसो से मैं अंडे खरीदूंगी। उन अंडो से मुझे अनेक अच्छी-अच्छी मुर्गियाँ मिलेगी। उन मुर्गियों को बेचकर मैं अपने लिए रेशमी साड़ी खरीदूंगी। उस रेशमी साड़ी मे मैं बहुत सुंदर दिखाई दूँगी। फिर अच्छे-अच्छे लड़के मेरे पास आएग। मुझसे शादी करना चाहेंगे। 

पर मैं इनकार में अपना सर झटकर कहूँगी नहीं। यह सोचते हुए उसने अपने सर को जोर से झटका दिया। इसके करण उसके सरपर रखा दूध का घड़ा जमीन पर गिर गया। उसका सारा दूध जमीन पर फैल कर बर्बाद हो गया। इस तरह अंडो मुर्गियों रेशमी साड़ी तथा अच्छे-अच्छे लड़को का ग्वालिन का सपना मिट्टी में मिल गया।

Moral – हवा में महल बनाना अच्छा नहीं।

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7. असली माँ (10 Lines Short Stories with Moral in Hindi)

एक बार दो स्त्रियाँ एक बच्चे के लिए झगड़ रही थी। प्रत्येक स्त्री यह दावा कर रही थी कि वही उस बच्चे की असली माँ है। जब किसी तरह झगड़ा नहीं सुलझा तो लोगों ने उन दोनों को न्यायधीश के सामने पेश किया। न्यायधीश ने ध्यानपूर्वक दोनों की दलीलें सुनीं। न्यायधीश के लिए भी यह निर्णय करना मुश्किल हो गया कि बच्चे की असली माँ कौन थी। न्यायधीश ने बहुत सोच-विचार किया। अखिरकार उसे एक उपाय सूझा। 

उसने अपने कर्मचारी को आदेश दिया, “इस बच्चे के दो दुकड़े कर दो और एक-एक टुकड़ा दोनों स्त्रियों को दे दो।” न्यायधीश का आदेश सुनकर उनमें से एक स्त्री ने धाड़ मारकर रोते हुए कहा, “नहीं, नहीं! ऐसा जुल्म मत करो। दया करो सरकार। भले ही यह बच्चा इसी स्त्री को दे दो, लेकिन मेरे लाल को जिंदा रहने दो! 

मैं बच्चे पर अपना दोवा छोड़ देती हूँ। पर दूसरी स्त्री कुछ नहीं बोली। वह चुपचाप यह सब देखती रही। अब चतुर न्यायधीश को मालूम हो गया था कि बच्चे की असली माँ कौन है। उसने बच्चा उस स्त्री को सौप दिया, जो उस पर अपना दावा छोड़ने के लिए तैयार थी। उसने दूसरी स्त्री को जेल भेज दिया।

Moral – सच्चाई की सदा विजय होती है।

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