10 Best Short Moral Stories in Hindi for Class 8 | हिंदी कहानियां 2022

आज हम इस लेख में कक्षा 8 की Short Moral Stories in Hindi for Class 8 की रोचक हिंदी कहानियां पढ़ेंगे। यह कहानियाँ आपको एक अच्छी बातें सिखाएगी। जो की आपके जीवन में आगे चलकर बहुत काम आएंगी। अगर आपको यह हिंदी कहानियां पसंद आए तो इसे शेयर जरूर कीजियेगा। तो आए जानते है Hindi Story for Class 8 के बारे में।

1. पुण्यात्मा बाघ (Moral Stories in Hindi for Class 8)

Moral stories in hindi for class 8

एक जंगल में एक बाघ रहता था। वह बहत बूढ़ा हो गया था। उसमें अब पहलेवाली ताकत और फुर्ती नहीं रह गयी थी। उसने सोचा, “अब मैं शिकार कर नहीं सकता। इसलिए पेट भरने के लिए मुझे कोई अन्य उपाय करना होगा।” बहुत सोचने-विचारने के बाद उस बाघ को एक युक्ति सूझी। उसने घोषणा की, “अब मैं बहुत बूढ़ा हो गया हूँ, इसलिए मैं अपनी बाकी जिंदगी पुण्यकर्मों में लगाऊँगा। अब से मैं घास और फल खाकर अपना गुजारा करुंगा और निरंतर प्रभु के नाम का स्मरण करुँगा। 

इसलिए जंगल के पशु-पक्षियों को मुझसे डरने की अब कोई जरुरत नहीं है।” भोलेभाले जानवर बाघ की चिकनी-चुपड़ी बातो में आ गए। वे कहने लगे,कितना महान संत है यह! हमें चलकर इसके दर्शन करने चाहिए। इस प्रकार हर रोज कुछ जानवर बाघ के दर्शन के लिए उसकी गफा में जाने लगे। बाघ इन भोलेभाले जानवरों को देखते ही उन पर टूट पड़ता और उन्ह मारकर खा जाता। इस प्रकार बूढ़ा बाघ आराम से अपना पेट भरने लगा। 

एक दिन एक लोमड़ी को इस पुण्यात्मा बाघ के बारे मं जानकारी मिली। उसने मन ही मन कहा, मैं बाघ की बातों पर विश्वास नहीं करती। बाघ भला घास और फल खाकर कैसे जिंदा रह सकता हैं? मैं खुद जाऊँगी और सच्चाई का पता लगाकर रहूँगी। दूसरे दिन लोमड़ी बाघ की गुफा पहुँची। गुफा के प्रवेशद्वार पर पहुँचकर वह ठिठक गई। वहाँ जमीन पर गुफा में गए हुए जानवरो के पंजों एवं खुरों के निशान पड़े हुए थे। 

लोमड़ी ने बारीकी से उन निशानों का निरीक्षण किया। उसे फौरन पता चल गया कि गुफा में जाने वाले जानवरों के पंजो एवं खुरो के निशान तो दिखाई देते हैं, पर गुफा से बाहर निकलने वाले किसी जानवर के पैरों के निशान कहीं नहीं हैं। लोमड़ी मन ही मन कहा, इस ढोंगी पुण्यात्मा को जिंदा रखने के लिए मैं अपनी जान नही दूँगी। वह गुफा के दरवाजे से लौट आई। 

Moral – मक्कार की चिकनी चुपड़ी बातों के चक्कर में कभी नहीं आना चाहिए।

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2. बाजीराव पेशवा और किसान (Hindi Story for Class 8)

Hindi story for class 8

बाजीराव पेशवा मराठा सेना के प्रधान सेनापति थे। एक बार वे अनेक लड़ाइयों मे विजय हासिल करके अपनी सेना सहित राजधानी लौट रहे थे। रास्ते में उन्होंने मालवा में अपनी सेना का पड़ाव डाला। बहुत दूर से चलते-चलते आ रहे उनके सैनिक थककर चूर हो गए थे। वे भूख-प्यास से व्याकुल थे और उनके पास खाने के लिए पर्याप्त सामग्री भी नहीं थी। बाजीराव ने अपने एक सरदार को बुलाकर आदेश दिया, तुम अपने साथ सौ सैनिकों को लेकर जाओ और किसी खेत से फसल कटवाकर छावनी में ले आओ।

सरदार सेना की एक टुकड़ी लेकर गाँव की ओर चल पड़ा। रास्ते में उसे एक किसान दिखाई दिया। सरदार ने उससे कहा देखो, तुम मुझे इस इलाके के सबसे बड़े खेतपर ले चलो। किसान उन्हें एक बहुत बड़े खेत के पास ले गया। सरदार ने सैनिकों को आदेश दिया, सारी फसल काट लो और अपने-अपने बोरों में भर लो। यह सुनकर किसान चकरा गया। उसने हाथ जोड़कर कहा, महाराज, आप इस खेत की फसल न काटें। मैं आपको एक दूसरे खेतपर ले चलता हूँ। 

उस खेत की फसल पककर एकदम तैयार है। सरदार और उसके सैनिक किसान के साथ दूसरे खेत की ओर चल पड़े। यह खेत वहाँ से कुछ मीलों की दूरी पर और बहुत छोटा था। किसान ने कहा, महाराज, आपको जितनी फसल चाहिए, इस खेत से कटवा लीजिए। सरदार को किसान की इस हरकत पर बहुत गुस्सा आया। उसने किसान से पूछा, यह खेत तो बहुत छोटा हैं। फिर तुम हमें वहाँ से इतनी दूर क्यों ले आए? किसान ने नम्रतापूर्वक उत्तर दिया, महाराज, नाराज मत होइए। 

वह खेत मेरा नहीं था। यह खेत मेरा है। इसीलिए मैं आपको यहाँ ले आया। किसान के जवाब से सरदार का गुस्सा ठंड़ा हो गया। वह अनाज कटवाए बिना ही पेशवा के पास पहुँचा। उसने यह बात पेशवा को बताई। पेशवा को अपनी गलती का एहसास हो गया। वे सरदार के साथ स्वयं किसान के खेत पर गए । उन्होंने किसान को उसकी फसल के बदले देर सारी अशरफियाँ दीं और फसल कटवाकर छावनी पर ले आए।

Moral – नम्रता का परिणाम हमेशा अच्छा होता है।

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3. न्यायी राजा (Short Moral Stories in Hindi for Class 8)

राजा विक्रम अपनी न्यायप्रियता के लिए प्रसिद्ध थे। एक बार वे अपने लिए एक शानदार राजमहल बनवा रहे थे। राजमहल का नक्शा तैयार हो चुका था। पर एक समस्या आड़ आ रही थी। राजमहल के निर्माण स्थान के पास ही एक झोपड़ी थी। इस झोपड़ी के कारण राजमहल की शोभा नष्ट हो रही थी। राजा ने झोपड़ी के मालिक को बुलवाया। 

उन्होंने अपनी समस्या के बारे में झोपड़ी के मालिक को बताया और झोपड़ी के बदले मोटी रकम देने का प्रस्ताव उसके सामने रखा। पर झोपड़ी का मालिक बहुत अड़ियल था। उसने राजा से कहा, “महाराज, माफ करें, आपका प्रस्ताव मुझे मंजूर नहीं है। अपनी झोपड़ी मुझे जान से भी ज्यादा प्यारी है। इसी झोपड़ी में मेरा जन्म हुआ था। मेरी पूरी उम्र इसी में गुजर गई। मैं अपनी इसी झोपड़ी में मरना भी चाहता हूँ।”

राजा ने सोचा, इस गरीब के साथ ज्यादती करना उचित नहीं है। उसने अपने मंत्री से कहा, “कोई हर्ज नहीं ! इस झोपड़ी को यहीं रहने दो। जब लोग इस शानदार महल को देखेंगे, तो वे मेरे सौंदर्यबोध की सराहना अवश्य करेंगे। जब वे राजमहल के समीप इस झोपड़ी को देखेंगे, तो मेरी न्यायप्रियता की भी तारीफ करेंगें।”

Moral – जियो और जीने दो। 

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4. बलवान कौन (Hindi Moral Stories for Class 8)

एक बार हवा और सूर्य में बहस छिड़ गई। हवा ने सूर्य से कहा, मैं तुमसे ज्यादा बलवान हूँ। नही, तुम मुझसे ज्यादा बलवान नही हो। सूर्य ने प्रतिवाद किया। तभी उनकी नजर विश्व भ्रमण पर निकले एक यात्री पर पड़ी। यात्री ने शाल ओढ़ रखी थी। हवा और सूर्य ने तय किया कि उनमें से जो भी उस यात्री की शाल उतरवाने में सफल होगा, वही बलवान कहलाएगा। 

पहली बारी हवा की आई। वह यात्री के कंधे से शाल उड़ाने के लिए पूरी ताकत से बहने लगी। पर हवा जितनी ज्यादा तेजी से बहती, यात्री उतना ही कसकर शाल को शरीर से लपेटने लगता। यह संघर्ष तब तक चलता रहा। जब तक कि हवा की बारी खत्म नहीं हो गई। अब सूर्य की बारी आई। वह जरा-सा मुस्कराया।

इससे यात्री को गरमी महसूस होने लगी। उसने जल्दी ही शाल की पकड़ ढीली कर दी। सूर्य की मुस्कराहट बढ़ती गई। इसके साथ गरमी भी बढती गई। फिर गरमी ने विकराल रूप धारण कर लिया। यात्री को अब शाल ओढने की जरूरत नही रही। उसने शाल उतारकर हाथ में ले ली। इस प्रकार सूर्य हवा से ज्यादा शक्तिशाली सिद्ध हुआ।

Moral – केवल धौंस जमाने से कोई ताकतवर नहीं माना जाता है।

5. शेर का हिस्सा (Moral Stories in Hindi)

Hindi moral stories for class 8

एक घनघोर जंगल था। उस जंगल में अनेक जानवर रहते थे। एक दिन रीछ, भेड़िया, लोमड़ी तथा शेर साथ-साथ शिकार करने निकले। शेर इन सब का अगुआ था। शीघ्र ही उन्होंने एक भैस पर हमलाकर उसे मार डाला। लोमडी ने भैंस के चार हिस्से किए। सभी जानवर अपना-अपना हिस्सा खाने के लिए बेताब हो रहे थे। 

तभी शेर ने दहाड़ते हुए कहा, “सब लोग शिकार से दूर हट जाओ और मेरी बात सुनो। शिकार का पहला हिस्सा मेरा है क्योंकि शिकार करने में मैं तुम लोगों का सहयोगी था। दूसरे हिस्से पर भी मेरा ही अधिकार है क्योंकि शिकार करने में मैं तुम लोगो का अगुआ था। तीसरा हिस्सा भी मेरा ही है क्योंकि यह हिस्सा मुझे अपने बच्चो के लिए चाहिए। 

अब रहा चौथा हिस्सा यदि तुम में से किसी को यह हिस्सा चाहिए। तो आ जाओ, मुझसे लड़ाई में जीतकर ले जाओ अपना हिस्सा। रीछ, भेड़िया और लोमड़ी नें चारो हिस्से शेर को दे दिए और वहाँ से चुपचाप खिसक गए। 

Moral – जिसकी लाठी उसकी भैंस।

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6. चतुर ज्योतषी (Short Moral Stories in Hindi for class 8)

एक सम्राट था। एक बार उसने प्रसिद्ध ज्योतिषी को अपने दरबार में बुलाया। ज्योतिषी अचूक भविष्यवाणी करने के लिए मशहूर था। सम्राट ने बड़े सम्मान से उसका स्वागत किया और उसे ऊँचे आसन पर बिठाया। फिर सम्राट ने उसे जन्म कुंडली दी और कहा, “पंडितजी, कृपया मेरी जन्म कुडंली पढ़कर मेरा भविष्य बताइए।” ज्योतिषी ने बड़ी सवधानी से सम्राट की कुंडली का अध्यन किया। 

फिर उसने कहा, “महाराज आपके गृह आपका भविष्य बता रहे है, वही मैं आपको बताऊँगा। मै काल्पनिक कहानियाँ नहीं कहता।” सम्राट ने कहा,” समझ गया आप क्या कहना चाहते है। आप निर्भीक होकर मेरा भविष्य बताइए।” ज्योतिषी ने सम्राट के बारे मे अच्छी-अच्छी बातें बताना शुरू किया। राजा का चेहरा आनंद से भविष्य के बारे मे अच्छी-अच्छी बाते सुनकर उसे बहुत खुशी हुई।

फिर ज्योतिषी ने राजा की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओ के बारे में बताना शुरू किया। इन बातो को सुनकर राजा बहुत दुखी हुआ। एक बार तो उसके मन में इतनी ठेस लगी कि उसने गुस्से में आकर कहा, “बंद करो अपनी ये वाहियात बातें। अब मुझे सिर्फ यह बताओ कि तुम्हारे ग्रहों की सूचना के अनुसार तुम्हारी मौत कब होने वाली है?” चतुर ज्योतिषी समझ गया कि सम्राट का आशय क्या है। 

उसने जवाब दिया,” महाराज मेरी मृत्यु आपकी मृत्यु के एक दिन पहले होने वाली है।” सम्राट बहुत गुस्से मे था। वह ज्योतिषी को मृत्युदंड देने वाला था। पर उसने ज्योतिषी के मुख से अपनी मौत की भविष्यवाणी सुनकर अपना इरादा बदल दिया। उसका गुस्सा शांत हो गया। सम्राट ने ज्योतिषी के बुधिमत्तापूर्ण उत्तर की बहुत सराहना की। उसने ज्योतिषी को मूल्यवान उपहार दिए और उसे सम्मान पूर्वक विदा किया।

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7. गरीब आदमी और अमीर आदमी (Hindi Story for Class 8)

एक गरीब मोची और एक धनी व्यापारी, दोनो पड़ोसी थे। मोची के घर में ही जूते चप्पल सीने की छोटी सी दुकान थी। काम करते-करते वह अक्सर मौज में आकर गाने लगता। वह बहुत निश्चिंत मस्तमौला आदमी था। उसे कभी अपने घर के दरवाजे खिड़कियाँ बंद करने की जरूरत नही महसूस हुई। वह रात को भगवान की पूजा करता और मजे से सो जाता। अमीर आदमी इस गरीब, हँसमुख मोची की ओर ईर्ष्या भरी नजर से देखा करता। 

गरीब होने के बावजूद उस मोची को किसी बात की चिंता नही थी। जबकि अमीर आदमी को तरह-तरह की चिंताएँ सताती ररहती थी। गाना-गुनगुनाने की बात तो दूर वह खुलकर हँस भी नही सकता था। उसे हमेशा अपनी तथा अपने धन की रक्षा की चिंता सताती रहती थी। रात को वह अपने मकान के सारे दरवाजे खिड़कियाँ बंद कर लेता था। फिर भी, उसे चैन की नींद नही आती थी। 

एक दिन अमीर आदमी ने मोची को अपने घर बुलाया। उसने उसे पाँच हजार रूपए दिए और कहा, “लो, ये पैसे रख लो। इन्हें अपने ही पैसे समझो। इन पैसो को मुझे लौटाने की जरूरत नही है।” इतने पैसे पाकर गरीब आदमी को पहले तो बड़ी खशी हुई। पर जल्दी ही इन पैसो ने उसके शांति और निश्चिंत जीवन में खलल पैदा कर दी। पैसे पाने पर वह जीवन में पहली बार उसने अपने घर का दरवाजा और खिड़कियाँ बंद कर उनमें चटखनी लगाई। 

यह देखने के लिए कि पैसे सुरक्षित हैं या नही रात को कई बार उसकी नींद टूटी। दूसरे दिन बड़े सवेरे गरीब मोची अपने धनी पड़ोसी के घर पहुँचा। उसने व्यापारी को पाँच हजार रूपए लौटाते हुए हाथ जोड़ कर कहा, “सेठजी, मेहरबानी करके आप अपना यह पैसा वापस ले लीजिए। इन पैसो ने तो मेरी रात की नींद हराम कर दी। मैं हँसना गाना सब भूल गया।”

Moral – पैसे से हर प्रकार की खुशी नही प्राप्त की जा सकती। 

8. एकता का बल (Short Moral Stories in Hindi for Class 8)

एक किसान था। उसके पाँच बेटे थे। सभी बलवान और मेहनती थे। पर वे हमेशा आपस में लड़ते-झगड़ते रहते थे। किसान यह देख कर बहुत चिंतित रहा करता था। वह चाहता था कि उसके बेटे आपस में लड़ाई झगड़ा न करें और मिलजुलकर रहें। किसान ने अपने बेटों को बहुत समझाया और डाँटा फटकारा भी, पर उनपर इसका कोई असर नहीं हुआ। किसान को हमेशा यही चिंता सताती रहती कि वह अपने बेटों में एकता कैसे कायम करे! 

एक दिन उसे अपनी समस्या का एक उपाय सूझा। उसने अपने पाँचों बेटों को बुलाया। उन्हें लकड़ियों का एक गट्ठर दिखाकर उसने पूछाँ, “क्या तुममें से कोई इस गटटर को खोले बिना तोड़ सकता है?” किसान के पाँचों बेटे बारी-बारी से आगे आए। उन्होंने खूब ताकत लगाई। पर उनमें से कोई भी लकड़ियों का गट्टर तोड़ नही सका। फिर किसान ने गट्ठर खोलकर लकड़ियों को अलग-अलग कर दिया। 

उसने अपने बेटों को एक-एक लकड़ी देकर उसे तोड़ने के लिए कहा। सभी लड़कों ने बहुत आसानी से अपनी-अपनी लकड़ी तोड़ डाली। किसान ने कहा, “देखा! एक-एक लकड़ी को तोड़ना कितना आसान होता है। इन्हीं लकड़ियों को एक साथ गट्ठर में बाँध देने पर ये कितनी मेजबूत हो जाती हैं। इसी तरह तुम लोग मिलजुलकर एक साथ रहोगे। तो मजबूत बनोगे और लड़ झगड़कर अलग-अलग हो जाओगे, तो कमजोर बनोगे।”

Moral – एकता में ही शक्ति है, फूट में ही है विनाश।

9. दो घड़े (Short Moral Stories in Hindi for Class 8)

एक बार एक नदी में जोरो की बाढ़ आई। तीन दिनों के बाद बाढ़ का जर कुछ कम हुआ। बाढ़ के पानी में ढेरों चीजें बह रही थीं। उनमें एक ताँबे का घड़ा और एक मिट्टी का घड़ा भी था। ये दोनों घड़े अगल-बगल तैर रहे थे। तॉँबे के घड़े ने मिट्टी के घड़े से कहा, अरे भाई, तुम तो नरम मिट्टी के बने हुए हो और बहुत नाजुक हो अगर तुम चाहो, तो मेरे समीप आ जाओ। मेरे पास रहने से तुम सुरक्षित रहोगे। 

मेरा इतना ख्याल रखने के लिए अपको धन्यवाद, मिट्टी का घड़ा बोला, मैं आपके करीब आने की हिम्मत नहीं कर सकता। आप बहुत मजबूत और बलिष्ठ हैं। मैं ठहरा कमजोर और नाजुक कहीं हम आपस में टकरा गए, तो मेरे टुकड़े-टुकड़े हो जाएँगे। यदि आप सचमुच मेरे हितैषी हैं, तो कृपया मुझसे थोड़ा दूर ही रहिए। इतना कहकर मिट्टी का घड़ा तैरता हुआ ताँबे के घड़ से दूर चला गया।

Moral – ताकवर पड़ोसी से दूर रहने में ही भलाई है।

10. चंडूल और किसान (Short Moral Stories in Hindi for Class 8)

मक्का के खेत में चंडूल चिड़िया ने अपनो घोंसला बनाया था। वह अपने बच्चो के साथ उस घोंसले में रहती थी। मक्के की फसल तैयार होने और कटने तक उनका घोंसला सुरक्षित था। एक दिन चंडूल ने अपने बच्चों से कहा, “अब फसल तैयार हो गयी है और कटनेवाली है। इसलिए हमें कहीं और घोंसला बना लेना चाहिए।” दूसरे दिन किसान खेत में आया। उसने किसी से बातचीत करते हुए कहा, “कल में अपने रिश्तेदारों को बुलाकर फसल की कटाई करूँगा।”

किसान की यह बात चंडूल और उसके बच्चों ने सुनी बच्चों ने कहा, “माँ जल्दी कर कल सूर्य अस्त होने से पहले हमें यह घोंसला छोड़ देना चाहिए। किसान कल फसल की कटाई करने वाला है।” माँ ने कहा, “घबराने की बात नही कल वह फसल की कटाई शुरू ही नही कर सकता।” दूसरे दिन किसान खेत पर आया। उसका कोई भी रिश्तेदार उसकी मदद करने नही पहुँचा था। इसलिए वह खाली हाथ वापस चला गया। 

जाते-जाते उसने कहा कल में अपने पड़ोसियों को बुलाकर लाऊँगा और फसल की कटाई जरूर करूँगा। चूंडल के बच्चों ने फिर अपनी माँ से कहा, “माँ जल्दी कर अब हमें घोंसला छोड़ देना चाहिए। पर माँ ने जवाब दिया, रूको! अभी घोंसला छोड़ने की जरूरत नही है। अगले दिन ठीक वही हुआ, जैसा चंड्रल ने सोचा था। किसान का कोई भी पड़ोसी उसकी मदद करने नही पहुँचा। 

मगर इस बार किसान ने कहा, अब दूसरों के भरोसे बैठे रहने से काम नही चलेगा। कल मैं खुद फसल की कटाई करुगा। यह सुनकर चंडूल ने अपने बच्चों से कहा, अब हमें तुरंत इस घोंसले को छोड़ देना चाहिए, क्योंकि कल किसान जरूर फसल की कटाई करेगा।

Moral – अपना काम अपने ही भरोसे होता है।

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