क्या आप जानते हैं कि भारत की भूमि पर भगवान शिव के 12 ऐसे स्थान हैं, जहाँ वे स्वयं प्रकाश रूप में प्रकट हुए थे? जिन्हें हम ज्योतिर्लिंग कहते हैं। एक शिव भक्त होने के नाते, इन पवित्र स्थानों के दर्शन करना जीवन का सबसे बड़ा सपना होता है।
आज के इस ब्लॉग में, हम 12 jyotirlinga name and place in hindi के बारे में विस्तार से जानेंगे। यह केवल एक सूची नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा है। यहाँ आपको हर ज्योतिर्लिंग का इतिहास, वहाँ कैसे पहुंचें, और मेरी व्यक्तिगत यात्रा सलाह भी मिलेगी। हिंदू धर्म में ज्योतिर्लिंगों का महत्व बहुत अधिक है, और पुराणों के अनुसार, इनके दर्शन मात्र से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं। अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया पर ज्योतिर्लिंग का इतिहास पढ़ सकते हैं।
इस लेख में हम 12 Jyotirlinga list in Hindi, उनके मंत्र और सटीक लोकेशन के बारे में चर्चा करेंगे। चलिए, शिव की भक्ति में डूबकर इस यात्रा को शुरू करते हैं।
12 Jyotirlinga List with State (सभी 12 ज्योतिर्लिंग राज्य सहित)
यात्रा शुरू करने से पहले, एक नज़र डालते हैं All 12 Jyotirlinga list with state पर, ताकि आप अपनी यात्रा की योजना आसानी से बना सकें।
| S.No | ज्योतिर्लिंग का नाम | स्थान | राज्य |
| 1 | सोमनाथ (Somnath) | वेरावल | गुजरात |
| 2 | मल्लिकार्जुन (Mallikarjuna) | श्रीशैलम | आंध्र प्रदेश |
| 3 | महाकालेश्वर (Mahakaleshwar) | उज्जैन | मध्य प्रदेश |
| 4 | ओंकारेश्वर (Omkareshwar) | खंडवा | मध्य प्रदेश |
| 5 | केदारनाथ (Kedarnath) | रुद्रप्रयाग | उत्तराखंड |
| 6 | भीमाशंकर (Bhimashankar) | पुणे | महाराष्ट्र |
| 7 | काशी विश्वनाथ (Kashi Vishwanath) | वाराणसी | उत्तर प्रदेश |
| 8 | त्र्यंबकेश्वर (Trimbakeshwar) | नासिक | महाराष्ट्र |
| 9 | वैद्यनाथ (Vaidyanath) | देवघर | झारखंड |
| 10 | नागेश्वर (Nageshwar) | द्वारका | गुजरात |
| 11 | रामेश्वरम (Rameshwaram) | रामेश्वरम | तमिलनाडु |
| 12 | घृष्णेश्वर (Grishneshwar) | औरंगाबाद | महाराष्ट्र |
1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (Somnath Jyotirlinga)

स्थान और महत्व: यह कहाँ है और क्यों प्रसिद्ध है?
सोमनाथ मंदिर को पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह पर स्थित है। अरब सागर के तट पर स्थित यह मंदिर अपनी भव्यता और इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। इसे ‘शाश्वत तीर्थ’ भी कहा जाता है क्योंकि इतिहास में इसे कई बार नष्ट किया गया, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ। समुद्र की लहरों की आवाज़ और मंदिर की घंटियाँ यहाँ एक अद्भुत वातावरण बनाती हैं।
पौराणिक कथा: चंद्र देव और श्राप
पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्रजापति दक्ष ने चंद्रमा (सोम) को क्षय रोग का श्राप दिया था। इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए चंद्रमा ने इसी स्थान पर भगवान शिव की घोर तपस्या की थी। शिव जी ने प्रसन्न होकर उन्हें श्राप मुक्त किया और यहाँ ‘सोमनाथ’ के रूप में विराजमान हुए।
कैसे पहुँचें?
- ट्रेन: सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन वेरावल (Veraval) है, जो मंदिर से मात्र 5-7 किलोमीटर दूर है।
- फ्लाइट: निकटतम हवाई अड्डा दीव (Diu) है, जो लगभग 85 किलोमीटर दूर है। राजकोट एयरपोर्ट भी एक विकल्प है।
- बस: गुजरात के प्रमुख शहरों से राज्य परिवहन की बसें उपलब्ध हैं।
दर्शन का समय और नियम
- समय: सुबह 6:00 बजे से रात 10:00 बजे तक।
- आरती: सुबह 7:00 बजे, दोपहर 12:00 बजे और शाम 7:00 बजे। शाम को यहाँ ‘लाइट एंड साउंड शो’ ज़रूर देखें।
- ड्रेस कोड: शालीन वस्त्र पहनें। शॉर्ट्स या बरमूडा पहनकर अंदर जाने की अनुमति नहीं है।
ज्योतिर्लिंग मंत्र (Shloka) – सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
अर्थ: सौराष्ट्र में श्री सोमनाथ और श्रीशैल पर श्री मल्लिकार्जुन का मैं स्मरण करता हूँ।
मेरी सलाह: यहाँ शाम की आरती के समय समुद्र से आती ठंडी हवा और शिव का जयकारा आपके रोंगटे खड़े कर देगा। होटल्स पहले ही बुक कर लें।
2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (Mallikarjuna Jyotirlinga)

स्थान और महत्व: यह कहाँ है और क्यों प्रसिद्ध है?
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में श्रीशैलम पर्वत पर कृष्णा नदी के तट पर स्थित है। इसे ‘दक्षिण का कैलाश’ भी कहा जाता है। यह एकमात्र ऐसा स्थान है जो ज्योतिर्लिंग होने के साथ-साथ एक शक्तिपीठ भी है। यहाँ शिव और शक्ति दोनों का वास माना जाता है।
पौराणिक कथा: चंद्र देव और श्राप
जब भगवान गणेश का विवाह पहले हो गया, तो कार्तिकेय नाराज होकर क्रौंच पर्वत पर चले गए। उन्हें मनाने के लिए शिव और पार्वती वहाँ आए। ‘मल्लिका’ का अर्थ पार्वती और ‘अर्जुन’ का अर्थ शिव है। इसलिए इस स्थान का नाम मल्लिकार्जुन पड़ा।
कैसे पहुँचें?
- ट्रेन: निकटतम रेलवे स्टेशन मारकापुर रोड (Markapur Road) है, जो लगभग 80 किलोमीटर दूर है।
- फ्लाइट: हैदराबाद का राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे पास है (लगभग 200 किमी)।
- बस: हैदराबाद और विजयवाड़ा से श्रीशैलम के लिए सीधी बस सेवा है। रास्ता बहुत ही सुंदर और घुमावदार है।
दर्शन का समय और नियम
- समय: सुबह 4:30 बजे से रात 10:00 बजे तक।
- नियम: यहाँ भक्त मुख्य शिवलिंग को छूकर पूजा कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए विशेष टिकट लेना पड़ता है।
ज्योतिर्लिंग मंत्र (Shloka) – श्रीशैले मल्लिकार्जुनं च उज्जयिन्यां महाकालम्।
अर्थ: श्रीशैल पर मल्लिकार्जुन और उज्जैन में महाकाल को नमन।
3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (Mahakaleshwar Jyotirlinga)

स्थान और महत्व: कालों के काल महाकाल
मध्य प्रदेश के उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित महाकालेश्वर दुनिया का एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यहाँ की ‘भस्म आरती’ विश्व प्रसिद्ध है। माना जाता है कि महाकाल के दर्शन मात्र से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है। यह Shiv Jyotirlinga names and location की सूची में सबसे शक्तिशाली स्थानों में से एक है।
पौराणिक कथा: दूषण राक्षस का वध
उज्जैन में दूषण नामक राक्षस ने भक्तों पर अत्याचार किया था। भक्तों की पुकार सुनकर भगवान शिव ने महाकाल के रूप में प्रकट होकर उसका वध किया और वहीं बस गए।
कैसे पहुँचें?
- ट्रेन: उज्जैन जंक्शन देश के सभी बड़े शहरों से जुड़ा है।
- फ्लाइट: इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डा (55 किमी) सबसे नज़दीक है।
- बस: इंदौर से उज्जैन के लिए हर 15 मिनट में बस मिलती है।
दर्शन का समय और नियम
समय: सुबह 4:00 बजे से रात 11:00 बजे तक।
भस्म आरती: यह सुबह 4:00 बजे होती है। इसके लिए ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य है।
ड्रेस कोड: गर्भगृह में जाने के लिए पुरुषों को धोती और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है।
ज्योतिर्लिंग मंत्र (Shloka) – उज्जयिन्यां महाकालमोंकारममलेश्वरम्।
अर्थ: उज्जैन में महाकाल और ओंकारेश्वर में अमलेश्वर की वंदना करता हूँ।
सावधानी: सावन के महीने में यहाँ लाखों की भीड़ होती है। यदि आप शांति से दर्शन करना चाहते हैं, तो सावन के अलावा अन्य दिनों में जाएं।
4. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (Omkareshwar Jyotirlinga)

स्थान और महत्व: ॐ के आकार का द्वीप
यह मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी के बीच एक द्वीप पर स्थित है। इस द्वीप का आकार ‘ॐ’ जैसा है, इसलिए इसे ओंकारेश्वर कहा जाता है। यहाँ दो मंदिर हैं—ओंकारेश्वर और ममलेश्वर, लेकिन दोनों को एक ही ज्योतिर्लिंग का रूप माना जाता है।
पौराणिक कथा: विंध्य पर्वत की तपस्या
विंध्य पर्वत ने अपनी ऊँचाई बढ़ाने के लिए शिव जी की पार्थिव लिंग बनाकर पूजा की थी। शिव जी प्रसन्न हुए और प्रणव (ॐ) लिंग के रूप में दो भागों में विभक्त होकर यहाँ स्थित हो गए।
कैसे पहुँचें?
- ट्रेन: ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन (12 किमी) निकटतम है, लेकिन इंदौर (77 किमी) बेहतर कनेक्टिविटी देता है।
- फ्लाइट: इंदौर एयरपोर्ट सबसे पास है।
- बस: उज्जैन या इंदौर से बस या टैक्सी द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।
दर्शन का समय और नियम
- समय: सुबह 5:00 बजे से रात 9:30 बजे तक।
- महत्व: यहाँ नर्मदा नदी में स्नान करना बहुत पुण्यदायी माना जाता है।
ज्योतिर्लिंग मंत्र (Shloka) – परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशंकरम्। (क्रम में आगे)
नोट: ओंकारेश्वर का मंत्र महाकाल के श्लोक में ही समाहित है।
5. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (Kedarnath Jyotirlinga)

स्थान और महत्व: हिमालय की गोद में
12 jyotirlinga name and place in hindi की सूची में केदारनाथ सबसे ऊँचाई पर स्थित है। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में मंदाकिनी नदी के पास स्थित यह मंदिर साल में केवल 6 महीने (अप्रैल से नवंबर) खुलता है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा अतुलनीय है।
पौराणिक कथा: पांडवों का प्रायश्चित
महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए शिव जी को खोज रहे थे। शिव जी बैल का रूप धारण कर केदारनाथ में छिप गए। भीम ने उन्हें पहचान लिया। वह बैल जमीन में धंसने लगा, लेकिन भीम ने उसकी पीठ पकड़ ली। वही पीठ आज पिंडी रूप में पूजी जाती है।
कैसे पहुँचें?
- ट्रेन: ऋषिकेश या हरिद्वार रेलवे स्टेशन सबसे नज़दीक हैं।
- सड़क: गौरीकुंड तक बस या टैक्सी से जा सकते हैं।
- ट्रैकिंग: गौरीकुंड से 16-18 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पैदल, खच्चर या डोली से करनी पड़ती है। हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध है।
दर्शन का समय और नियम
- समय: सुबह 4:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक, फिर शाम 5:00 बजे से।
- नियम: यहाँ मौसम बहुत जल्दी बदलता है, इसलिए गर्म कपड़े और रेनकोट साथ रखें।
ज्योतिर्लिंग मंत्र (Shloka) – हिमालये तु केदारं डाकिन्यां भीमशंकरम्।
अर्थ: हिमालय में केदारनाथ और डाकिनी में भीमशंकर को नमन।
महत्वपूर्ण: जाने से पहले अपना मेडिकल चेकअप जरूर कराएं, क्योंकि वहाँ ऑक्सीजन की कमी हो सकती है।
6. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग (Bhimashankar Jyotirlinga)
स्थान और महत्व: प्रकृति की गोद में
भीमाशंकर महाराष्ट्र के पुणे के पास सह्याद्रि पर्वतमाला में स्थित है। यह स्थान भीमा नदी का उद्गम स्थल भी है। यहाँ का शिवलिंग बहुत मोटा है, इसलिए इसे ‘मoteshwar महादेव’ भी कहा जाता है। यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा है और ट्रैकिंग के लिए भी प्रसिद्ध है।
पौराणिक कथा: कुंभकर्ण के पुत्र का वध
कुंभकर्ण के पुत्र भीम ने देवताओं को परेशान कर रखा था। भगवान शिव ने उसका वध किया। युद्ध के दौरान शिव जी के पसीने से भीमा नदी उत्पन्न हुई।
कैसे पहुँचें?
- ट्रेन: पुणे रेलवे स्टेशन (110 किमी) सबसे सुविधाजनक है।
- फ्लाइट: पुणे एयरपोर्ट।
- बस: पुणे के शिवाजी नगर बस स्टैंड से सीधी बसें चलती हैं।
दर्शन का समय और नियम
- समय: सुबह 4:30 बजे से रात 9:30 बजे तक।
- विशेष: यह एक वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी भी है, जहाँ आपको उड़न गिलहरी (Giant Squirrel) देखने को मिल सकती है।
ज्योतिर्लिंग मंत्र (Shloka) – डाकिन्यां भीमशंकरम्।
7. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग (Kashi Vishwanath Jyotirlinga)
स्थान और महत्व: मोक्ष की नगरी
उत्तर प्रदेश के वाराणसी (बनारस) में गंगा तट पर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर का हिंदू धर्म में सर्वोच्च स्थान है। कहा जाता है कि काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी है। यहाँ प्राण त्यागने वाले को सीधे मोक्ष मिलता है। यह Shiv Jyotirlinga names and location में सबसे अधिक देखे जाने वाले स्थानों में से एक है।
पौराणिक कथा: प्रकाश का स्तंभ
जब ब्रह्मा और विष्णु में श्रेष्ठता का विवाद हुआ, तो शिव जी एक अनंत ज्योति स्तंभ के रूप में प्रकट हुए। वह स्तंभ यही काशी माना जाता है।
कैसे पहुँचें?
- ट्रेन: वाराणसी जंक्शन (कैंट) और दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (मुगलसराय) प्रमुख स्टेशन हैं।
- फ्लाइट: लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा, बाबतपुर।
- स्थानीय: मंदिर तक जाने के लिए ई-रिक्शा या पैदल मार्ग (विश्वनाथ कॉरिडोर) सबसे अच्छा है।
दर्शन का समय और नियम
- समय: सुबह 3:00 बजे से रात 11:00 बजे तक।
- नियम: मंदिर परिसर में मोबाइल और चमड़े की वस्तुएं ले जाना मना है।
ज्योतिर्लिंग मंत्र (Shloka) – वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
अर्थ: वाराणसी में विश्वनाथ और गौतमी (गोदावरी) तट पर त्र्यंबकेश्वर।
मेरी सलाह: सुबह की मंगला आरती और गंगा आरती का अनुभव जीवन भर याद रहेगा। बनारस की गलियों की लस्सी पीना न भूलें।
8. त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (Trimbakeshwar Jyotirlinga)
स्थान और महत्व: तीन मुखों वाला शिवलिंग
महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित त्र्यंबकेश्वर मंदिर गोदावरी नदी के उद्गम के पास है। यहाँ के शिवलिंग की विशेषता यह है कि इसमें तीन छोटे लिंग हैं जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक हैं। मंदिर काले पत्थरों से बना है और वास्तुकला अद्भुत है।
पौराणिक कथा: गौतम ऋषि और गंगा
गौतम ऋषि पर गौहत्या का पाप लगा था। उन्होंने शिव जी की तपस्या की और गंगा को धरती पर लाने का वरदान माँगा। शिव जी यहाँ प्रकट हुए और गंगा (गोदावरी) भी अवतरित हुईं।
कैसे पहुँचें?
- ट्रेन: नासिक रोड रेलवे स्टेशन (36 किमी) सबसे पास है।
- सड़क: नासिक शहर से ऑटो या बस द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।
दर्शन का समय और नियम
- समय: सुबह 5:30 बजे से रात 9:00 बजे तक।
- विशेष पूजा: यहाँ कालसर्प दोष निवारण पूजा और नारायण नागबलि पूजा विशेष रूप से की जाती है।
ज्योतिर्लिंग मंत्र (Shloka) – त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
9. वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग (Vaidyanath Jyotirlinga)
स्थान और महत्व: आरोग्य का धाम
इसे बैजनाथ धाम भी कहा जाता है। यह झारखंड के देवघर (देवों का घर) में स्थित है। सावन के महीने में यहाँ लाखों कांवरिये सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर 100 किमी पैदल चलकर जल चढ़ाने आते हैं। यह 12 Jyotirlinga list in Hindi में एक प्रमुख तीर्थ है।
पौराणिक कथा: रावण और शिवलिंग
रावण ने शिव जी को लंका ले जाने के लिए तपस्या की। शिव जी ने शर्त रखी कि शिवलिंग को रास्ते में कहीं नीचे नहीं रखना है। रावण को लघुशंका लगी और उसने एक ग्वाले (विष्णु जी) को शिवलिंग पकड़ा दिया। ग्वाले ने शिवलिंग जमीन पर रख दिया और वह वहीं स्थापित हो गया। रावण ने उसे हिलाने की कोशिश में अंगूठा गड़ा दिया, जिससे वह टूट गया। रावण ने वहां अपनी गलती सुधारी और वैद्य बनकर शिव की सेवा की, इसलिए इसे वैद्यनाथ कहते हैं।
कैसे पहुँचें?
- ट्रेन: जसीडीह जंक्शन (Jasidih) सबसे नज़दीकी मुख्य स्टेशन है।
- फ्लाइट: अब देवघर में भी हवाई अड्डा शुरू हो गया है।
दर्शन का समय
- समय: सुबह 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक।
ज्योतिर्लिंग मंत्र (Shloka) – परल्यां वैद्यनाथं च।
अर्थ: परली (या चिताभूमि) में वैद्यनाथ।
10. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (Nageshwar Jyotirlinga)
स्थान और महत्व: नागों के ईश्वर
यह गुजरात में द्वारकापुरी के पास स्थित है। यहाँ भगवान शिव की एक विशाल प्रतिमा है जो बहुत दूर से दिखाई देती है। इसे ‘दारुकावन’ क्षेत्र भी माना जाता है। यह ज्योतिर्लिंग बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
पौराणिक कथा: दारुका राक्षसी
दारुका नामक राक्षसी ने सुप्रिया नामक शिव भक्त को कैद कर लिया था। सुप्रिया की पुकार पर शिव जी नागेश्वर रूप में प्रकट हुए और उसे बचाया।
कैसे पहुँचें?
- ट्रेन: द्वारका रेलवे स्टेशन यहाँ से लगभग 16-18 किमी दूर है।
- रूट: आप द्वारका दर्शन के साथ इसे भी कवर कर सकते हैं। ऑटो और टैक्सी आसानी से उपलब्ध हैं।
दर्शन का समय
- समय: सुबह 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक।
ज्योतिर्लिंग मंत्र (Shloka) – नागेशं दारुकावने।
अर्थ: दारुकावन में नागेश्वर।
11. रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग (Rameshwaram Jyotirlinga)
स्थान और महत्व: दक्षिण का धाम
तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप पर स्थित यह मंदिर चार धामों में से एक है। यहाँ की वास्तुकला, विशेषकर 1000 खंभों वाला कॉरिडोर, विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ समुद्र में 22 कुंड हैं, जिनमें स्नान करना पवित्र माना जाता है।
पौराणिक कथा: राम द्वारा स्थापना
लंका पर चढ़ाई करने से पहले भगवान राम ने समुद्र तट पर रेत का शिवलिंग बनाकर शिव जी की पूजा की थी, ताकि उन्हें रावण (जो एक ब्राह्मण था) को मारने के पाप से मुक्ति मिल सके।
कैसे पहुँचें?
- ट्रेन: रामेश्वरम रेलवे स्टेशन। पंबन ब्रिज से ट्रेन का सफर बहुत रोमांचक होता है।
- फ्लाइट: मदुरै एयरपोर्ट (170 किमी) सबसे नज़दीक है।
दर्शन का समय और नियम
- समय: सुबह 5:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक, और फिर दोपहर 3:00 बजे से रात 9:00 बजे तक।
- नियम: मुख्य मंदिर में दर्शन से पहले 22 कुंडों में स्नान करना होता है।
ज्योतिर्लिंग मंत्र (Shloka) – सेतुबन्धे च रामेशं।
अर्थ: सेतुबंध पर रामेश्वरम।
12. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग (Grishneshwar Jyotirlinga)
स्थान और महत्व: अंतिम ज्योतिर्लिंग
यह महाराष्ट्र के औरंगाबाद के पास वेरुल (एलोरा) गुफाओं के नज़दीक स्थित है। इसे 12वां और अंतिम ज्योतिर्लिंग माना जाता है। मंदिर का निर्माण लाल पत्थरों से हुआ है और इस पर नक्काशी बहुत सुंदर है।
पौराणिक कथा: घुश्मा की भक्ति
घुश्मा नामक शिव भक्त के पुत्र की हत्या उसकी ही बहन ने कर दी थी। घुश्मा ने अपने दुख को शिव भक्ति में लगा दिया। शिव जी ने प्रसन्न होकर उसके पुत्र को जीवित किया और यहाँ घृष्णेश्वर के रूप में बस गए।
कैसे पहुँचें?
- ट्रेन: औरंगाबाद रेलवे स्टेशन (30 किमी) पास है।
- फ्लाइट: औरंगाबाद एयरपोर्ट।
- घूमने की जगह: पास ही में विश्व प्रसिद्ध एलोरा की गुफाएं हैं, तो आप दोनों एक साथ देख सकते हैं।
दर्शन का समय
- समय: सुबह 5:30 बजे से रात 9:30 बजे तक।
- नियम: पुरुषों को गर्भगृह में जाने के लिए शर्ट उतारनी पड़ती है।
ज्योतिर्लिंग मंत्र (Shloka) – घुश्मेशं च शिवालये।
अर्थ: शिवालय में घुश्मेश्वर (घृष्णेश्वर)।
12 Jyotirling ka Mantra (संपूर्ण श्लोक)
जब भी आप इन ज्योतिर्लिंगों का स्मरण करें, तो इस 12 jyotirling ka Mantra का जाप करें। यह मन को शांति देता है:
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोंकारममलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशंकरम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम क्या हैं? (What are the 12 Jyotirlinga names?)
ये हैं: सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर।
Q2. ज्योतिर्लिंग और सामान्य शिवलिंग में क्या अंतर है?
शिवलिंग मानव द्वारा स्थापित हो सकता है, लेकिन ‘ज्योतिर्लिंग’ वह स्थान है जहाँ भगवान शिव स्वयं प्रकाश रूप में प्रकट हुए थे।
Q3. किस ज्योतिर्लिंग में दर्शन करना सबसे कठिन है?
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की यात्रा सबसे कठिन मानी जाती है क्योंकि यह उच्च हिमालय में है और यहाँ पहुँचने के लिए खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है।
Q4. क्या महाकालेश्वर में भस्म आरती में महिलाएं शामिल हो सकती हैं?
हाँ, महिलाएं भस्म आरती देख सकती हैं, लेकिन आरती के दौरान उन्हें घूंघट करना होता है। वर्तमान नियमों के अनुसार साड़ी पहनना अनिवार्य है।
Q5. दक्षिण भारत में कितने ज्योतिर्लिंग हैं?
दक्षिण भारत में मुख्य रूप से दो ज्योतिर्लिंग हैं – मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश) और रामेश्वरम (तमिलनाडु)।
निष्कर्ष (Conclusion)
दोस्तों, 12 jyotirlinga name and place in hindi का यह ब्लॉग केवल जानकारी नहीं, बल्कि आस्था का एक छोटा सा प्रयास है। शिव जी के ये 12 धाम भारत की आध्यात्मिक एकता को दर्शाते हैं। चाहे वह हिमालय की बर्फ हो या रामेश्वरम का समुद्र, हर जगह शिव की मौजूदगी का अहसास होता है।
मेरी सलाह है कि जीवन में कम से कम एक बार इन स्थानों की यात्रा ज़रूर करें। अगर आप एक साथ नहीं जा सकते, तो एक-एक करके योजना बनाएं। क्या आपने इनमें से किसी ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए हैं? अपना अनुभव कमेंट बॉक्स में ज़रूर शेयर करें। हर हर महादेव!
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